आज का दिन हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। पंचांग के अनुसार, आज कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार मनाए जा रहे हैं, जो जीवन में शुभता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। पंचांग न सिर्फ शुभ-अशुभ मुहूर्त बताता है, बल्कि यह हमारे दैनिक कार्यों के लिए मार्गदर्शन भी करता है। आइए जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग विश्लेषण!
🌅 आज का पंचांग एवं तिथि
09 फरवरी 2026, सोमवार
🌄 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय
| 🌞 सूर्योदय | 06:19 AM |
|---|---|
| 🌅 सूर्यास्त | 05:43 PM |
| 🌙 चन्द्रोदय | 12:24 AM (10 फरवरी) |
| 🌚 चन्द्रास्त | 10:49 AM |
🗓️ पंचांग विवरण
| घटक | विवरण | गुण एवं धर्म |
|---|---|---|
| तिथि | अष्टमी (पूर्ण रात्रि तक) | कृष्ण पक्ष, शुभता मध्यम |
| नक्षत्र | विशाखा (पूर्ण रात्रि तक) | धर्म, ज्ञान, संतुलन |
| योग | वृद्धि (12:52 AM, 10 फरवरी तक) | उन्नति, वृद्धि |
| करण | बालव (06:12 PM तक), कौलव (पूर्ण रात्रि तक) | स्थिरता, निर्णय |
| वार | सोमवार | शिव पूजा, शांति |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष | साधना, व्रत |
| स्थान | पुरी (जगन्नाथ पुरी) | तीर्थ, आध्यात्मिकता |
🗓️ चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर
| घटक | विवरण |
|---|---|
| विक्रम सम्वत | 2082 कालयुक्त |
| शक सम्वत | 1947 विश्वावसु |
| गुजराती सम्वत | 2082 पिङ्गल |
| चन्द्रमास | फाल्गुन (पूर्णिमान्त), माघ (अमान्त) |
| बृहस्पति संवत्सर | कालयुक्त (03:07 PM, 25 अप्रैल 2025 तक) |
🌕 राशि तथा नक्षत्र
| घटक | विवरण |
|---|---|
| चन्द्र राशि | तुला (01:11 AM, 10 फरवरी तक), फिर वृश्चिक |
| सूर्य राशि | मकर |
| नक्षत्र पद | विशाखा (11:44 AM तक, फिर 06:27 PM तक) |
| सूर्य नक्षत्र | धनिष्ठा (09:10 PM तक) |
🌱 ऋतु तथा अयन
| घटक | विवरण |
|---|---|
| द्रिक ऋतु | शिशिर |
| वैदिक ऋतु | शिशिर |
| द्रिक अयन | उत्तरायण |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
| दिनमान | 11 घंटे 24 मिनट 09 सेकंड |
| रात्रिमान | 12 घंटे 35 मिनट 22 सेकंड |
🕉️ शुभ समय (Auspicious Timings)
इन समयों में पूजा, आराधना, नए कार्य आरंभ करना, शिक्षा, यात्रा, खरीदारी आदि शुभ माने जाते हैं।
| मुहूर्त | समय | उपयुक्त कार्य |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:38 AM – 05:29 AM | ध्यान, पूजा, मंत्र |
| प्रातः सन्ध्या | 05:03 AM – 06:19 AM | संध्या वंदन, स्नान |
| अभिजित मुहूर्त | 11:38 AM – 12:24 PM | शुभ कार्य, आरंभ |
| विजय मुहूर्त | 01:55 PM – 02:41 PM | यात्रा, विजय कार्य |
| गोधूलि मुहूर्त | 05:41 PM – 06:06 PM | गृह प्रवेश, पूजा |
| सायाह्न सन्ध्या | 05:43 PM – 06:59 PM | संध्या वंदन, दीपदान |
| अमृत काल | 10:04 PM – 11:51 PM | पूजा, मंत्र जाप |
| निशिता मुहूर्त | 11:36 PM – 12:26 AM (10 फरवरी) | रात्रि पूजा, तंत्र साधना |
⚠️ अशुभ समय (Inauspicious Timings)
इन समयों में विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, वाहन आदि खरीदना वर्जित है।
| अशुभ काल | समय | निषेध कार्य |
|---|---|---|
| राहुकाल | 07:44 AM – 09:10 AM | शुभ कार्य, पूजा, खरीदारी |
| यमगण्ड | 10:35 AM – 12:01 PM | नया कार्य आरंभ |
| दुर्मुहूर्त | 12:24 PM – 01:09 PM | कोई भी शुभ कार्य |
| गुलिक काल | 01:27 PM – 02:52 PM, 02:41 PM – 03:26 PM | शुभ कार्य, यात्रा |
| वर्ज्य | 11:19 AM – 01:06 PM | पूजा, शुभ कार्य |
| आडल योग | पूरे दिन | शुभ कार्य वर्जित |
| विंछुड़ो | 01:11 AM (10 फरवरी) – 06:18 AM (10 फरवरी) | शुभ कार्य वर्जित |
| बाण | रोग – 05:04 AM (10 फरवरी तक) | नया कार्य, आरंभ |
🕰️ अन्य कैलेण्डर एवं युग
| घटक | विवरण |
|---|---|
| कलियुग | 5126 वर्ष |
| कलि अहर्गण | 1872615 दिन |
| जूलियन दिनांक | जनवरी 27, 2026 CE |
| जूलियन दिन | 2461080.5 दिन |
| राष्ट्रीय दिनांक | माघ 20, 1947 शक |
🔔 पंचक रहित मुहूर्त
| समय | पंचक प्रकार | उपयुक्त कार्य |
|---|---|---|
| 06:19 AM – 06:35 AM | चोर पंचक | सीमित कार्य, सावधानी |
| 06:35 AM – 08:11 AM | शुभ मुहूर्त | शुभ कार्य, पूजा |
| 08:11 AM – 09:45 AM | रोग पंचक | स्वास्थ्य संबंधी कार्य वर्जित |
| 09:45 AM – 11:28 AM | चोर पंचक | चोरी, विवाद से बचें |
| 11:28 AM – 01:27 PM | शुभ मुहूर्त | नया कार्य, खरीदारी |
| 01:27 PM – 03:40 PM | रोग पंचक | स्वास्थ्य संबंधी कार्य वर्जित |
| 03:40 PM – 05:54 PM | शुभ मुहूर्त | पूजा, गृह प्रवेश |
| 05:54 PM – 08:02 PM | मृत्यु पंचक | जोखिम भरे कार्य वर्जित |
| 08:02 PM – 10:10 PM | अग्नि पंचक | अग्नि संबंधी कार्य वर्जित |
| 10:10 PM – 12:22 AM (10 फरवरी) | शुभ मुहूर्त | पूजा, मंत्र जाप |
| 12:22 AM – 02:36 AM (10 फरवरी) | रज पंचक | रज संबंधी कार्य वर्जित |
| 02:36 AM – 04:42 AM (10 फरवरी) | शुभ मुहूर्त | पूजा, ध्यान |
| 04:42 AM – 06:18 AM (10 फरवरी) | चोर पंचक | विवाद, चोरी से बचें |
🏠 निवास और शूल
| घटक | विवरण |
|---|---|
| होमाहुति | गुरु (बृहस्पति) |
| दिशा शूल | पूर्व |
| अग्निवास | पाताल |
| चन्द्र वास | पश्चिम (01:11 AM, 10 फरवरी तक) |
| शिववास | गौरी के साथ, उत्तर (01:11 AM, 10 फरवरी से) |
| राहु वास | उत्तर-पश्चिम |
| कुम्भ चक्र | गर्भ |
🛕 दैनिक उपवास और त्यौहार
🌸 जानकी जयंती
जानकी जयंती माता सीता के जन्म दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस दिन भक्तजन माता सीता की पूजा करते हैं, व्रत रखते हैं, और रामायण का पाठ करते हैं। पूजा में सीता माता के चित्र या मूर्ति को फूल, अक्षत, धूप, दीप, एवं नैवेद्य अर्पित किया जाता है। महिलाएँ विशेष रूप से व्रत रखती हैं और माता सीता से सुख, शांति एवं परिवार की समृद्धि की कामना करती हैं। घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन का आयोजन होता है।
पूजन विधि:
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- माता सीता की मूर्ति/चित्र को स्थापित करें।
- पुष्प, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य अर्पित करें।
- रामायण का पाठ या सीता स्तुति करें।
- व्रत का संकल्प लें, फलाहार करें।
🕉️ कालाष्टमी
कालाष्टमी भगवान काल भैरव की पूजा का दिन है। इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं, मंदिरों में जाकर भगवान भैरव की आराधना करते हैं, और कुत्तों को भोजन कराते हैं क्योंकि कुत्ता भैरव जी का वाहन है। विशेष रूप से तंत्र साधना, रक्षा एवं भय निवारण के लिए यह दिन शुभ है।
पूजन विधि:
- प्रातः स्नान करें।
- भैरव जी की प्रतिमा को जल, दूध, पुष्प, बेलपत्र अर्पित करें।
- भैरव चालीसा या मंत्र का पाठ करें।
- कुत्तों को भोजन दें।
🌑 मासिक कृष्ण जन्माष्टमी
यह मासिक पर्व भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का मासिक स्मरण है। भक्तजन उपवास रखते हैं, श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं, और रात में जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन विशेष रूप से श्रीकृष्ण के बालरूप की पूजा, भजन-कीर्तन, और प्रसाद वितरण होता है।
पूजन विधि:
- श्रीकृष्ण की मूर्ति/चित्र को स्नान कराएं।
- वस्त्र, आभूषण, पुष्प, धूप, दीप अर्पित करें।
- श्रीकृष्ण मंत्र/अष्टक का पाठ करें।
- फलाहार करें, रात को जन्मोत्सव मनाएं।
📝 अन्य उपयोगी जानकारी
- पंचांग का उपयोग संकल्प, पूजा, विवाह, गृह प्रवेश, यात्रा, व्यापार, शिक्षा आदि के लिए सही समय निर्धारण हेतु किया जाता है।
- पंचांग के पाँच अंग (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण) के आधार पर ही शुभ-अशुभ योगों की गणना की जाती है।
- आज विशाखा नक्षत्र एवं वृद्धि योग जीवन में सकारात्मकता एवं उन्नति का संकेत देते हैं।
- सोमवार को शिव पूजा विशेष फलदायक मानी जाती है।
- पंचक रहित मुहूर्त में ही अत्यंत शुभ कार्य करना चाहिए।
- आज के दिन पूर्व दिशा में यात्रा से बचें, दिशा शूल है।
- चन्द्रबल, ताराबल की गणना से आज के लिए उत्तम राशि और नक्षत्र भी देखे जा सकते हैं।


