आज का पंचांग विश्लेषण – 20 फरवरी 2026, शुक्रवार 🌞🌙
आज का दिन धार्मिक, आध्यात्मिक और कर्मकांड के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस दैनिक पंचांग में सूर्य, चंद्र, नक्षत्र, योग, करण सहित सभी शुभ-अशुभ मुहूर्तों का वैज्ञानिक और वैदिक दृष्टिकोण से विश्लेषण प्रस्तुत है। इस जानकारी से आप अपने दैनिक कार्यों, पूजा-अर्चना और शुभकार्य के लिए सर्वोत्तम समय का चयन कर सकते हैं।
1. आज का पंचांग एवं तिथि
20 फरवरी 2026, शुक्रवार
स्थान: पुरी (जगन्नाथ पुरी), भारत
तिथि: शुक्ल पक्ष, तृतीया (02:38 PM तक)
वार: शुक्रवार
पक्ष: शुक्ल पक्ष
स्थान: पुरी (जगन्नाथ पुरी), भारत
तिथि: शुक्ल पक्ष, तृतीया (02:38 PM तक)
वार: शुक्रवार
पक्ष: शुक्ल पक्ष
2. सूर्य एवं चंद्र उदय समय
| घटना | समय |
|---|---|
| सूर्योदय | 06:13 AM |
| सूर्यास्त | 05:48 PM |
| चंद्र उदय | 07:52 AM |
| चंद्र अस्त | 08:31 PM |
3. पंचांग विवरण (पुरी – जगन्नाथ पुरी)
| तत्व | विवरण | गुण एवं धर्म |
|---|---|---|
| तिथि | तृतीया (शुक्ल पक्ष) – 02:38 PM तक | शुभ तिथि, नए कार्य के लिए उत्तम |
| नक्षत्र | उत्तर भाद्रपद – 08:07 PM तक | स्थिरता, ज्ञान, आध्यात्मिकता बढ़ाने वाला |
| योग | साध्य – 06:23 PM तक | सभी कार्यों के लिए शुभ |
| करण | गर – 02:38 PM तक | शुभ कर्मों के लिए उपयुक्त |
| वार | शुक्रवार | देवी-शक्ति और सौंदर्य के लिए शुभ |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष | विकास और वृद्धि का पक्ष |
4. चंद्र मास, संवत एवं बृहस्पति संवत्सर
- विक्रम संवत: 2082 कालयुक्त
- बृहस्पति संवत्सर: कालयुक्त (25 अप्रैल 2025 तक)
- चंद्र मास: फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत: 1947 विश्वावसु (शक संवत)
5. राशि तथा नक्षत्र
- चंद्र राशि: मीन
- नक्षत्र पद: उत्तर भाद्रपद (08:32 AM तक)
- सूर्य राशि: कुम्भ
- सूर्य नक्षत्र: शतभिषा (08:07 PM तक)
6. ऋतु तथा अयन
- द्रिक ऋतु: वसन्त (बसंत)
- वैदिक ऋतु: शिशिर (शीतकाल)
- द्रिक अयन: उत्तरायण
- वैदिक अयन: उत्तरायण
7. शुभ समय (Auspicious Timings) ✨
| मुहूर्त | समय | उपयुक्त कार्य |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:34 AM से 05:23 AM | पूजा, ध्यान, अध्ययन, नए कार्य प्रारंभ |
| अभिजित मुहूर्त | 11:37 AM से 12:24 PM | सभी शुभ कार्य, यात्रा, सौदेबाजी |
| विजय मुहूर्त | 01:56 PM से 02:43 PM | यात्रा, शुभ कार्य, नए प्रोजेक्ट की शुरुआत |
| अमृत काल | 03:28 PM से 05:01 PM | स्वास्थ्य, पूजा, यात्रा, शुभ कार्य |
| सायाह्न संध्या | 05:48 PM से 07:03 PM | संध्या वंदन, पूजा, परिवार के साथ समय व्यतीत |
| निशिता मुहूर्त | 11:35 PM से 12:25 AM (अगले दिन) | आध्यात्मिक कार्य, मंत्र जाप, ध्यान |
8. अशुभ समय (Inauspicious Timings) ⚠️
| अशुभ काल | समय | निषेध कार्य |
|---|---|---|
| राहुकाल | 10:34 AM से 12:01 PM | नया कार्य शुरू न करें, विशेषकर विवाह, गृह प्रवेश |
| यमगण्ड | 02:54 PM से 04:21 PM | शुभ कार्य टालें |
| गुलिक काल | 07:40 AM से 09:07 AM | महत्वपूर्ण निर्णय टालें |
| विडाल योग | 06:13 AM से 08:07 PM | विवाद, झगड़ा, महत्वपूर्ण कार्य न करें |
| दुर्मुहूर्त | 08:32 AM से 09:18 AM | शुभ कार्य टालें |
9. अन्य कैलेंडर एवं युग
- कलियुग वर्ष: 5126
- जूलियन दिनांक: 2461091.5
- राष्ट्रीय नागरिक दिनांक: फाल्गुन 01, 1947 शक
- संशोधित जूलियन दिन: 61091
10. पंचक रहित मुहूर्त (विशेष विवरण)
आज के दिन पंचक के विभिन्न कालों का विस्तार इस प्रकार है:
| मुहूर्त | समय | विवरण |
|---|---|---|
| मृत्यु पंचक | 06:13 AM से 07:28 AM | शुभ कार्य से बचें |
| अग्नि पंचक | 07:28 AM से 09:01 AM | नए कार्य के लिए अशुभ |
| शुभ मुहूर्त | 09:01 AM से 10:44 AM | सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम |
| मृत्यु पंचक | 10:44 AM से 12:44 PM | सावधानी आवश्यक |
| अग्नि पंचक | 12:44 PM से 02:38 PM | नए कार्य टालें |
| शुभ मुहूर्त | 02:38 PM से 02:57 PM | शुभ कार्यों के लिए छोटा समय |
| रज पंचक | 02:57 PM से 05:10 PM | अशुभ कार्य टालें |
| शुभ मुहूर्त | 05:10 PM से 07:19 PM | शुभ कार्यों के लिए उत्तम |
| चोर पंचक | 07:19 PM से 08:07 PM | सावधानी आवश्यक |
| शुभ मुहूर्त | 08:07 PM से 09:27 PM | शुभ कार्यों के लिए उत्तम |
| रोग पंचक | 09:27 PM से 11:39 PM | अशुभ कार्य टालें |
| शुभ मुहूर्त | 11:39 PM से 01:53 AM (अगले दिन) | शुभ कार्यों के लिए उत्तम |
11. निवास और शूल
- होमाहुति: सूर्य – 08:07 PM तक
- दिशा शूल: पश्चिम
- बुध वास: उत्तर
- अग्निवास: पाताल (02:38 PM तक)
- राहु वास: दक्षिण-पूर्व
- पृथ्वी: कुम्भ चक्र (पूर्व)
- भद्रावास: मृत्यु (01:51 AM से पूर्ण रात्रि तक)
- शिववास: सभा में (02:38 PM तक)
12. दैनिक उपवास और त्यौहार
आज के दिन कोई विशेष त्यौहार या उपवास पंचांग में निर्दिष्ट नहीं है, परन्तु शुक्रवार होने के कारण देवी पूजा, विशेषकर माँ दुर्गा, काली या लक्ष्मी की आराधना अत्यंत शुभ मानी जाती है।
शुक्रवार का महत्व:
शुक्रवार को माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखकर या पूजा-अर्चना करके धन, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
शुक्रवार को माँ लक्ष्मी और माँ दुर्गा की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखकर या पूजा-अर्चना करके धन, समृद्धि और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।
पूजा विधि:
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्वच्छ जल से स्नान करें।
- माँ दुर्गा या लक्ष्मी के चित्र या मूर्ति के सामने दीपक जलाएं।
- लाल या पीले वस्त्र पहनें।
- फूल, अक्षत, चंदन, और लाल रंग के फल चढ़ाएं।
- दुर्गा सप्तशती या लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें।
- उपवास रखने वाले लोग फलाहार कर सकते हैं या हल्का भोजन लें।
13. अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- आज का सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी है, जो सभी कार्यों के लिए अत्यंत शुभ है।
- राहुकाल और अन्य अशुभ कालों में नए कार्य आरंभ करने से बचें।
- पंचांग के अनुसार आज का दिन धार्मिक अनुष्ठान, यात्रा, विवाह, और नए कार्यों के लिए उपयुक्त है, विशेषकर शुभ मुहूर्तों में।
- सूर्य और चंद्र की राशि की स्थिति से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति के योग बने हुए हैं।
स्रोत एवं अधिक जानकारी के लिए:
https://www.jyotishdev.com
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