नमस्ते! ज्योतिषदेव.कॉम पर आपके विशेषज्ञ वैदिक ज्योतिषी के रूप में, मैं आपको 26 जुलाई 2026, रविवार के पावन दिन के लिए जगन्नाथ पुरी, ओडिशा का विस्तृत पंचांग प्रस्तुत कर रहा हूँ। आज की ऊर्जा आध्यात्मिक उन्नति और शुभ कार्यों के लिए अत्यंत अनुकूल है।
आज का दिन रवि प्रदोष व्रत और देवशयनी एकादशी के पारण के साथ-साथ, जगन्नाथ पुरी में ‘अधारा पाना’ अनुष्ठान का भी साक्षी है, जो भगवान की कृपा का विशेष अवसर प्रदान करता है।
🌞 सूर्य और चंद्रमा (Sun & Moon)
| घटना | समय (जगन्नाथ पुरी, ओडिशा के अनुसार) |
|---|---|
| सूर्योदय | 05:42 AM |
| सूर्यास्त | 07:11 PM |
| चंद्रोदय | 05:06 PM |
| चंद्रास्त | 02:20 AM (27 जुलाई) |
📅 आज का पंचांग (Panchang Details)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तिथि | आषाढ़ शुक्ल द्वादशी 01:58 PM तक, तत्पश्चात त्रयोदशी |
| नक्षत्र | ज्येष्ठा 07:34 AM तक, तत्पश्चात मूल |
| योग | इंद्र 10:04 PM तक, तत्पश्चात वैधृति |
| करण | बालवा 01:58 PM तक, तत्पश्चात कौलव |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| ऋतु | वर्षा ऋतु |
| अयन | दक्षिणायन |
| चंद्र राशि | वृश्चिक 07:34 AM तक, तत्पश्चात धनु |
✨ शुभ मुहूर्त (Auspicious Times)
| मुहूर्त का नाम | समय |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | 12:00 PM – 12:54 PM |
| अमृत काल (अमृत चौघड़िया) | 10:45 AM – 12:26 PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:17 AM – 04:58 AM |
⚠️ अशुभ समय (Inauspicious Times)
| समय का नाम | समय |
|---|---|
| राहु काल | 05:30 PM – 07:11 PM |
| यमगंड | 12:27 PM – 02:10 PM |
| गुलिक काल | 03:30 PM – 05:00 PM |
🕉️ व्रत और त्यौहार (Festivals)
आज 26 जुलाई 2026, रविवार को कई महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन हैं:
यह दिन **रवि प्रदोष व्रत** के रूप में मनाया जा रहा है, जो भगवान शिव को समर्पित है. रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु प्रदान करने वाला माना जाता है. भक्तजन भगवान शिव की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
आज **देवशयनी एकादशी का पारण** भी किया जाएगा. देवशयनी एकादशी के व्रत का पारण द्वादशी तिथि में किया जाता है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है.
जगन्नाथ पुरी में, आज **’अधारा पाना’ (Adhara Pana)** अनुष्ठान आयोजित होगा. यह जगन्नाथ रथ यात्रा उत्सव के समापन समारोहों में से एक है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा को उनके रथों पर विराजमान रहते हुए विशेष मीठा पेय अर्पित किया जाता है. इस पेय को दूध, पनीर, केला, गुड़ और सुगंधित मसालों से बनाया जाता है.
इसके अतिरिक्त, आज **वासुदेव द्वादशी / वामन द्वादशी** भी है, जो भगवान विष्णु के वामन अवतार और वासुदेव रूप की पूजा के लिए समर्पित है. देवशयनी एकादशी के अगले दिन इसका विशेष महत्व होता है.
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