कुंडली में रिश्ते टूटने के 7 ज्योतिषीय संकेत: प्रेम संबंधों में दूरी के कारक और उपाय 2026

Last updated: August 26, 2026

प्रेम संबंधों में लगातार गलतफहमियां, दूरी, या परिस्थितिजन्य दबाव अक्सर लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या उनकी कुंडली में ही रिश्ते में टूटन या अलगाव के संकेत मौजूद हैं। वैदिक ज्योतिष में, किसी रिश्ते की स्थिरता या उसमें आने वाली चुनौतियों का आकलन करने के लिए 7वां भाव (विवाह और साझेदारी का), उसके स्वामी, शुक्र (प्रेम का कारक), चंद्रमा (मन), मंगल (ऊर्जा, विवाद), राहु-केतु (भ्रम, अलगाव), और शनि (विलंब, दूरी) जैसे कई ग्रहों और भावों का गहन विश्लेषण किया जाता है। ये संकेत, जिन्हें सामान्य भाषा में ‘Breakup Yoga in Kundli’ कहा जाता है, बताते हैं कि कब प्रेम संबंधों में दूरी, संघर्ष, या अलगाव की संभावनाएँ प्रबल हो सकती हैं।

Key Takeaways

  • 7वें भाव का महत्व: विवाह और साझेदारी का 7वां भाव रिश्तों में स्थिरता का प्राथमिक संकेतक है; इस पर पाप ग्रहों का प्रभाव अलगाव का संकेत दे सकता है [2]।
  • शुक्र की स्थिति: प्रेम और रिश्तों के कारक ग्रह शुक्र का पीड़ित या कमजोर होना प्रेम संबंधों में चुनौतियाँ ला सकता है [5]।
  • 7वें भाव के स्वामी की स्थिति: 7वें भाव के स्वामी का 6वें, 8वें या 12वें भाव में होना या पाप ग्रहों से पीड़ित होना रिश्ते में तनाव का कारण बन सकता है [1]।
  • राहु-केतु का प्रभाव: राहु-केतु 1/7 धुरी पर या शुक्र/7वें भाव के स्वामी से संबंध बनाने पर रिश्तों में भ्रम, अप्रत्याशितता और अलगाव पैदा कर सकते हैं [3]।
  • मंगल का प्रभाव: मंगल की क्रूरता और उग्रता, विशेषकर 7वें भाव या शुक्र से संबंधित होने पर, संघर्ष और ब्रेकअप योग का कारण बन सकती है।
  • शनि की भूमिका: शनि का 7वें भाव या शुक्र पर प्रभाव रिश्ते में दूरी, उदासीनता या प्रतिबद्धता में देरी ला सकता है, लेकिन यह स्थायित्व भी प्रदान करता है [4]।
  • दशा और गोचर: कुंडली में मौजूद योग तभी फलित होते हैं जब संबंधित ग्रहों की दशा, अंतरदशा और गोचर सक्रिय हों, जिससे अलगाव का समय निर्धारित होता है [4]।
  • उपाय और परामर्श: किसी योग का मतलब निश्चित ब्रेकअप नहीं है; सचेत संवाद, व्यवहारिक बदलाव और ज्योतिषीय उपाय रिश्तों में स्थिरता ला सकते हैं।

कुंडली में ब्रेकअप योग क्या होता है? (What is Breakup Yoga in Kundli Astrology?)

कुंडली में ब्रेकअप योग कोई एक विशिष्ट ग्रह संयोजन नहीं है बल्कि यह विभिन्न ज्योतिषीय स्थितियों का एक समूह है जो पारंपरिक ज्योतिषियों द्वारा रिश्तों में दूरी, तनाव, मतभेद, अलगाव, प्रतिबद्धता संबंधी समस्याओं या बड़े बदलावों से जोड़ा जाता है। ये योग जन्म कुंडली में रिश्तों की कमजोरियों या चुनौतियों को दर्शाते हैं, लेकिन इनका होना निश्चित रूप से किसी घटना की गारंटी नहीं देता। किसी भी रिश्ते का परिणाम केवल ग्रहों पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के प्रयासों, संचार कौशल और आपसी समझ पर भी निर्भर करता है [8]।

कुंडली में ब्रेकअप योग क्या होता है? (What is Breakup Yoga in Kundli Astrology?)

कुंडली में ब्रेकअप योग के 7 प्रमुख ज्योतिषीय संकेत (What are the 7 Astrological Signs of Relationship Breakup?)

वैदिक ज्योतिष में, प्रेम संबंधों में दरार या अलगाव के संभावित ज्योतिषीय संकेतों को समझने के लिए कई कारकों का विश्लेषण किया जाता है। यहाँ कुंडली में रिश्ते टूटने के 7 मुख्य ज्योतिषीय संकेत दिए गए हैं, जो प्रेम संबंधों में चुनौतियाँ दर्शा सकते हैं।

1. 7वें भाव या 7वें भाव के स्वामी पर पाप ग्रहों का प्रभाव (7th House Affliction and Relationship Problems in Kundli)

7वां भाव सीधे तौर पर विवाह, साझेदारी और दीर्घकालिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है [2]। यदि 7वें भाव में शनि, मंगल, राहु या केतु जैसे पाप ग्रह बैठे हों, या वे इस भाव पर सीधी दृष्टि डाल रहे हों, तो यह संबंधों में तनाव और संघर्ष का संकेत हो सकता है। उदाहरण के लिए, 7वें भाव में शनि संबंधों में दूरी, देरी या उदासीनता ला सकता है, जबकि मंगल झगड़े और अहंकार के टकराव को बढ़ा सकता है [1]। राहु और केतु भ्रम और अप्रत्याशितता पैदा कर सकते हैं। हालांकि, केवल एक ग्रह की उपस्थिति को नकारात्मक नहीं मानना चाहिए; ग्रह की राशि, उसकी शक्ति, शुभ ग्रहों के साथ उसके संबंध और समग्र चार्ट संदर्भ को देखना आवश्यक है। यदि 7वें भाव का स्वामी (7वें भाव का अधिपति ग्रह) कमजोर स्थिति में हो, जैसे कि नीच राशि में, शत्रु राशि में, या 6वें, 8वें या 12वें भाव में हो, तो यह भी रिश्तों में चुनौतियों का संकेत देता है [2]।

2. शुक्र की कमजोर या पीड़ित स्थिति (Which Planets Cause Relationship Breakup According to Vedic Astrology?)

शुक्र ग्रह प्रेम, आकर्षण, संबंधों और वैवाहिक सुख का प्राथमिक कारक (significator) माना जाता है [5]। यदि कुंडली में शुक्र कमजोर, अस्त (सूर्य के निकट होने पर), नीच राशि में, या पाप ग्रहों (शनि, मंगल, राहु, केतु) के साथ जुड़ा हुआ हो या उनसे पीड़ित हो, तो यह प्रेम संबंधों में असंतोष, प्रेम की कमी या बार-बार ब्रेकअप का संकेत दे सकता है [5]। राहु या केतु के साथ शुक्र का संबंध भ्रमित करने वाले या अपरंपरागत संबंध दे सकता है, जो अक्सर अस्थिर होते हैं। इसी तरह, शनि के साथ शुक्र संबंधों में भावनात्मक दूरी या ठंडेपन को बढ़ा सकता है [4]। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि एक मजबूत शुक्र भी हर रिश्ते की समस्या को खत्म नहीं कर सकता है, क्योंकि संबंधों में कई अन्य मानवीय और ज्योतिषीय कारक भी भूमिका निभाते हैं।

3. 7वें भाव के स्वामी की चुनौतीपूर्ण स्थिति (How to Identify Breakup Yoga in Birth Chart?)

7वें भाव के स्वामी की स्थिति रिश्ते की स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि 7वें भाव का स्वामी 6वें (शत्रुता, मुकदमेबाजी), 8वें (बाधाएँ, रहस्य) या 12वें (हानि, अलगाव) जैसे चुनौतियों वाले भावों में स्थित हो, तो यह प्रेम संबंधों में बाधाओं या अलगाव का कारण बन सकता है [2]। इसके अलावा, यदि 7वें भाव का स्वामी अस्त हो (सूर्य के प्रभाव से कमजोर), वक्री हो (जिससे उसके प्रभाव में अप्रत्याशितता आए), या नीच राशि में हो, तो भी यह उसकी शक्ति को कमजोर कर देता है। शुभ ग्रहों जैसे गुरु (बृहस्पति) या चंद्रमा का समर्थन प्राप्त न होने पर, 7वें भाव का स्वामी रिश्तों में आवश्यक स्थिरता प्रदान करने में असमर्थ हो सकता है, जिससे कुंडली में ब्रेकअप योग की संभावना बढ़ जाती है [1]।

4. राहु-केतु और रिश्तों में असामान्य उतार-चढ़ाव (Rahu-Ketu and Relationship Instability in Kundli)

राहु और केतु छाया ग्रह हैं जो रिश्तों में भ्रम, अत्यधिक अपेक्षाएं, या अचानक उतार-चढ़ाव ला सकते हैं, खासकर यदि वे 1/7 धुरी (लग्न और 7वें भाव) पर स्थित हों [3]। राहु, जब लग्न या 7वें भाव में होता है, तो अक्सर अत्यधिक आकर्षण और अपरंपरागत संबंधों की ओर ले जाता है, जो अंततः भ्रम या मोहभंग का कारण बन सकता है। यह व्यक्ति को रिश्ते से बहुत अधिक उम्मीदें रखने वाला बना सकता है, जिसके पूरा न होने पर निराशा होती है [3]। वहीं, केतु का लग्न या 7वें भाव में होना भावनात्मक अलगाव, दूरी या रिश्ते से असंतुष्टि का कारण बन सकता है। यह व्यक्ति को अनासक्ति की ओर धकेलता है, जिससे रिश्ते में खालीपन महसूस हो सकता है। शुक्र या 7वें भाव के स्वामी के साथ इनका संबंध रिश्तों में अप्रत्याशित मोड़ ला सकता है, जिससे प्रेम संबंध ज्योतिष में अस्थिरता बढ़ जाती है। 2026 में, राहु का कुंभ राशि में गोचर कार्यस्थल पर चुनौतियों का संकेत दे सकता है, जो अप्रत्यक्ष रूप से तनाव को बढ़ा सकता है। 2026 में कुंभ राशि में राहु: ऑफिस पॉलिटिक्स और अचानक नौकरी में बदलाव

5. मंगल का प्रभाव और वैवाहिक तनाव (Mangal’s Influence and Marital Conflict in Kundli)

मंगल ग्रह को जुनून, ऊर्जा, मुखरता और कभी-कभी क्रोध या संघर्ष का कारक माना जाता है। यदि मंगल 7वें भाव, लग्न, 4थे, 8वें या 12वें भाव में हो और उस पर अन्य पाप ग्रहों का प्रभाव हो, तो यह मांगलिक दोष का निर्माण करता है, जिसे अक्सर वैवाहिक जीवन में तनाव और संघर्ष से जोड़ा जाता है [6]। हालांकि, केवल मांगलिक होना रिश्ते की विफलता की गारंटी नहीं देता है। मंगल की मजबूत स्थिति संबंधों में जुनून और ऊर्जा ला सकती है, लेकिन यदि यह पीड़ित हो, तो यह आक्रामकता, अधीरता और लगातार झगड़ों को जन्म दे सकता है। 7वां भाव विवाह ज्योतिष में मंगल का अत्यधिक प्रभाव संबंधों में अहं के टकराव और नियंत्रण की इच्छा को बढ़ा सकता है, जिससे बार-बार ब्रेकअप या अलगाव की स्थिति बन सकती है [6]। दोनों भागीदारों की कुंडली में मंगल की स्थिति और उसकी शक्ति का संपूर्ण विश्लेषण आवश्यक है।

6. शनि और लंबे समय का Relationship Pressure (Venus Saturn Aspect Breakup Yoga Meaning)

शनि ग्रह अनुशासन, विलंब, जिम्मेदारी और धीरज का प्रतीक है। जब शनि 7वें भाव या शुक्र पर प्रभाव डालता है, तो यह रिश्ते में दूरी, भावनात्मक भारीपन, प्रतिबद्धता में देरी या जिम्मेदारियों के कारण उत्पन्न दबाव का अनुभव करा सकता है [4]। यह रिश्तों को धीमी गति से आगे बढ़ाता है और व्यक्ति को अधिक समय लेने वाला बना सकता है। शनि का प्रभाव रिश्तों को ठंडा या औपचारिक बना सकता है, जहाँ भावनात्मक जुड़ाव की कमी महसूस हो सकती है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि यही शनि मजबूत और स्थायी रिश्तों में स्थिरता और गहरी प्रतिबद्धता भी प्रदान कर सकता है। यदि शनि शुभ प्रभाव में हो और व्यक्ति धैर्य व समझदारी से काम ले, तो शनि का प्रभाव रिश्तों को मजबूत नींव प्रदान कर सकता है। शनि का गोचर भी रिश्तों में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है [4]।

7. दशा और गोचर: कब सक्रिय हो सकता है Breakup Yoga? (When Does Breakup Yoga Activate Timing in Life?)

जन्म कुंडली में कोई भी संभावित योग या संयोजन तब तक पूरी तरह से फलित नहीं होता जब तक कि संबंधित ग्रहों की दशा (मुख्य अवधि), अंतरदशा (उप-अवधि) और गोचर (ग्रहों का वर्तमान भ्रमण) सक्रिय न हो जाए [4]। उदाहरण के लिए, यदि किसी की कुंडली में 7वें भाव के स्वामी पर पाप ग्रहों का प्रभाव है, तो यह योग उस समय सक्रिय हो सकता है जब 7वें भाव के स्वामी, शुक्र, या पाप ग्रहों (राहु, केतु, शनि, मंगल) की दशा या अंतरदशा चल रही हो। इसके अतिरिक्त, जब शनि या गुरु जैसे बड़े ग्रह 7वें भाव या 7वें भाव के स्वामी पर गोचर करते हैं, तो वे भी रिश्ते में महत्वपूर्ण परिवर्तन या चुनौतियों का समय ला सकते हैं। ग्रहों का गोचर, जैसे कि राहु-केतु का 1/7 धुरी पर आना, भी संबंधों में उतार-चढ़ाव को बढ़ा सकता है [4]। इन अवधियों का विश्लेषण करके ही कुंडली में ब्रेकअप योग के सक्रिय होने का सटीक समय बताया जा सकता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि दशा और गोचर के दौरान ही किसी योग की पूरी क्षमता प्रकट होती है।

क्या Breakup Yoga का मतलब निश्चित ब्रेकअप है? (Does Breakup Yoga Always Mean Separation Will Happen?)

नहीं, कुंडली में किसी भी Breakup Yoga का मतलब यह कतई नहीं है कि रिश्ता निश्चित रूप से टूट जाएगा। ज्योतिषीय योग केवल संभावित चुनौतियों, तनाव या संवेदनशील समय की ओर संकेत करते हैं। रिश्तों का वास्तविक परिणाम कई अन्य वास्तविक जीवन के कारकों पर भी निर्भर करता है जैसे कि दोनों भागीदारों के बीच संचार, भावनात्मक परिपक्वता, आपसी समझ, परिवार की परिस्थितियाँ, वित्तीय दबाव और व्यक्तिगत विकल्प। ज्योतिष एक मार्गदर्शक है, अंतिम फैसला नहीं [9]। एक मजबूत और प्रेमपूर्ण रिश्ता, भले ही ज्योतिषीय चुनौतियाँ हों, दोनों व्यक्तियों के सचेत प्रयासों और इच्छाशक्ति से बनाए रखा जा सकता है।

क्या Breakup Yoga का मतलब निश्चित ब्रेकअप है? (Does Breakup Yoga Always Mean Separation Will Happen?)

क्या Breakup Yoga को Relationship Stability में बदला जा सकता है? (Can Breakup Yoga Be Remedied or Reduced?)

हाँ, वैदिक ज्योतिष में ऐसे कई उपाय बताए गए हैं जिनसे कुंडली में ब्रेकअप योग के नकारात्मक प्रभावों को कम करके रिश्ते में स्थिरता लाई जा सकती है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये उपाय आस्था-आधारित और परंपरागत हैं, न कि गारंटीकृत समाधान [10]।

  • शुक्र से जुड़े सकारात्मक उपाय: शुक्र को मजबूत करने के लिए शुक्रवार के दिन देवी लक्ष्मी या मां दुर्गा की पूजा करना, सफेद वस्त्र धारण करना, इत्र या सुगंधित वस्तुओं का उपयोग करना और दान करना शुभ माना जाता है।
  • मंत्र जाप: शुक्र मंत्र (ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः), शिव-पार्वती मंत्र, या भगवान कृष्ण और राधा की उपासना से प्रेम संबंधों में सामंजस्य बढ़ सकता है।
  • रत्न धारण: अनुभवी ज्योतिषी की सलाह पर शुक्र ग्रह से संबंधित रत्न जैसे हीरा या ओपल धारण करना लाभकारी हो सकता है, बशर्ते कुंडली में उसकी अनुकूल स्थिति हो।
  • रिलेशनशिप में कॉन्शियस कम्युनिकेशन: ज्योतिषीय उपायों के साथ-साथ, रिश्ते में सचेत और प्रभावी संवाद बनाए रखना, क्रोध प्रबंधन सीखना और धैर्य का अभ्यास करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • दान: सफेद वस्तुओं जैसे चावल, चीनी, दूध, दही, या सफेद वस्त्रों का दान करना भी शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने में सहायक माना जाता है।

दोनों की कुंडली मिलाना क्यों जरूरी है? (How Accurate is Breakup Yoga Prediction in Astrology?)

किसी भी रिश्ते या विवाह की ज्योतिषीय स्थिति का आकलन केवल एक व्यक्ति की कुंडली देखकर अधूरा रह सकता है। दोनों भागीदारों की कुंडली का मिलान करना (Kundali Matching) अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दोनों व्यक्तियों के 7वें भाव, 7वें भाव के स्वामी, शुक्र, चंद्रमा और अन्य महत्वपूर्ण ग्रहों के आपसी संबंधों को दर्शाता है [10]।

दोनों की कुंडली मिलाना क्यों जरूरी है? (How Accurate is Breakup Yoga Prediction in Astrology?)

  • सप्तम भाव का विश्लेषण: यह विवाह और साझेदारी के भाव का विश्लेषण करने में मदद करता है कि दोनों की कुंडलियों में यह भाव कितना मजबूत या पीड़ित है।
  • शुक्र और चंद्रमा की स्थिति: प्रेम, भावनाओं और मानसिक अनुकूलता के लिए शुक्र और चंद्रमा की स्थिति का मिलान आवश्यक है।
  • मांगलिक दोष और दशा अनुकूलता: मांगलिक दोष का विचार और दोनों की दशा-अंतरदशा की अनुकूलता भी देखी जाती है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में बड़े संघर्षों की संभावना कम हो।
  • नवांश (D9) चार्ट: विवाह के बाद के जीवन और वैवाहिक सुख का विश्लेषण करने के लिए नवांश चार्ट का भी गहन अध्ययन किया जाता है [8]।

संपूर्ण कुंडली मिलान से संभावित चुनौतियों को पहले से समझा जा सकता है और उनके लिए उपयुक्त उपाय किए जा सकते हैं, जिससे रिश्ते को मजबूत बनाया जा सके।

FAQ

कुंडली में ब्रेकअप योग क्या होता है?

कुंडली में ब्रेकअप योग उन ज्योतिषीय संयोजनों को संदर्भित करता है जो रिश्तों में तनाव, अलगाव या टूटन की संभावना को दर्शाते हैं, जैसे 7वें भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव या कमजोर शुक्र।

ब्रेकअप योग और तलाक योग में क्या अंतर है?

ब्रेकअप योग मुख्य रूप से प्रेम संबंधों में अलगाव को दर्शाता है, जबकि तलाक योग विशेष रूप से विवाह के कानूनी अंत (तलाक) की संभावनाओं को इंगित करता है, जिसमें विवाह के 7वें और 8वें भाव के साथ-साथ कानूनी प्रक्रियाओं के भावों का अधिक गहन विश्लेषण किया जाता है [1]।

क्या ब्रेकअप योग हमेशा अलगाव का कारण बनता है?

नहीं, ब्रेकअप योग केवल संभावित चुनौतियों और संवेदनशील समय का संकेत है। यह निश्चित अलगाव की गारंटी नहीं देता, क्योंकि रिश्ते का भविष्य व्यक्तिगत प्रयासों, संचार और आपसी समझ पर भी निर्भर करता है।

कौन से ग्रह रिश्ते में ब्रेकअप का कारण बनते हैं?

शनि (दूरी, विलंब), मंगल (संघर्ष, क्रोध), राहु (भ्रम, अप्रत्याशितता), केतु (अलगाव, अनासक्ति), और पीड़ित शुक्र (प्रेम की कमी) प्रमुख ग्रह हैं जिन्हें रिश्ते में ब्रेकअप योग से जोड़ा जाता है।

7वें भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव क्या होता है?

7वें भाव पर पाप ग्रहों का प्रभाव (जैसे शनि, मंगल, राहु, केतु) संबंधों में तनाव, संघर्ष, दूरी या अप्रत्याशित चुनौतियों को जन्म दे सकता है, जिससे प्रेम संबंध ज्योतिष में स्थिरता प्रभावित होती है।

शुक्र-शनि युति का प्रेम संबंधों पर क्या प्रभाव होता है?

शुक्र-शनि युति या दृष्टि संबंध प्रेम संबंधों में भावनात्मक दूरी, प्रतिबद्धता में देरी, या रिश्ते में गंभीरता और स्थिरता ला सकती है, लेकिन यह उदासीनता का कारण भी बन सकती है [4]।

ब्रेकअप योग कब सक्रिय हो सकता है?

ब्रेकअप योग तब सक्रिय हो सकता है जब संबंधित ग्रहों (जैसे 7वें भाव के स्वामी, शुक्र, राहु, केतु, शनि, मंगल) की दशा, अंतरदशा या गोचर काल चल रहा हो [4]।

क्या ब्रेकअप योग को कम करने के लिए कोई उपाय हैं?

हाँ, पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय जैसे शुक्र मंत्र का जाप, शिव-पार्वती की उपासना, दान, और रिश्ते में सचेत संचार व धैर्य का अभ्यास ब्रेकअप योग के नकारात्मक प्रभावों को कम करने में मदद कर सकते हैं।

क्या दो ब्रेकअप योग वाले लोग एक साथ रह सकते हैं?

यदि दोनों भागीदारों की कुंडलियों में ब्रेकअप योग हो, तो भी वे सचेत प्रयासों, मजबूत संचार, आपसी समझ और ज्योतिषीय उपायों के माध्यम से एक स्थिर और सफल रिश्ता बना सकते हैं।

ज्योतिषीय परामर्श की लागत कितनी होती है?

ज्योतिषीय परामर्श की लागत ज्योतिषी के अनुभव, प्रसिद्धि और सेवाओं पर निर्भर करती है। यह सामान्यतः कुछ सौ रुपये से लेकर कई हजार रुपये तक हो सकती है।

क्या मांगलिक दोष ब्रेकअप योग से भी बदतर है?

दोनों ही स्थितियाँ रिश्तों में चुनौतियाँ पैदा कर सकती हैं। मांगलिक दोष विवाह में ऊर्जा और संघर्ष की अधिकता को दर्शाता है, जबकि ब्रेकअप योग अलगाव के अन्य विभिन्न कारणों को कवर करता है। दोनों की गंभीरता कुंडली के समग्र विश्लेषण पर निर्भर करती है।

निष्कर्ष

2026 में, अपनी कुंडली में रिश्ते टूटने के ज्योतिषीय संकेत को समझना प्रेम संबंधों में आने वाली चुनौतियों को बेहतर ढंग से जानने का एक सशक्त तरीका है। हालाँकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि कुंडली में Breakup Yoga in Kundli या कोई भी कुंडली में ब्रेकअप योग का अर्थ यह नहीं कि रिश्ता निश्चित रूप से टूट जाएगा। ज्योतिषीय संकेत केवल संभावित तनाव, परिवर्तन या संवेदनशील समय की ओर संकेत कर सकते हैं, लेकिन रिश्ते का वास्तविक भविष्य दोनों व्यक्तियों के व्यवहार, समझ, संवाद और निर्णयों पर भी निर्भर करता है। किसी गंभीर रिश्ते के फैसले,जैसे ब्रेकअप या तलाक,को केवल ज्योतिषीय भविष्यवाणी के आधार पर नहीं लेना चाहिए। इसके बजाय, ज्योतिषीय मार्गदर्शन को आत्म-जागरूकता बढ़ाने, चुनौतियों का सामना करने और एक मजबूत तथा स्थायी संबंध बनाने के लिए एक उपकरण के रूप में उपयोग करें।

References

[1] Combinationdivorce – https://www.astroshastra.com/Marriage%20Astrology/combinationdivorce.php
[2] Marriage,separation And Divorce In Vedic Astrology – https://sitharsastrology.com/blog/marriage,separation-and-divorce-in-vedic-astrology
[3] Astrological Combinations For Divorce Separation – https://www.scribd.com/doc/82672674/Astrological-Combinations-for-Divorce-Separation
[4] Marriage Separation Divorce Yoga Timing Astrology – https://astroananta.com/marriage-separation-divorce-yoga-timing-astrology
[5] Divorce Indications In Kundli – https://astromedha.in/insights/vedic/divorce-indications-in-kundli
[6] Watch – https://www.youtube.com/watch?v=BFhFnIL393I
[7] Watch – https://www.youtube.com/watch?v=CcOSSeInEuA
[8] Understanding The Yogas In A Kundli Birth Chart That Indicate Divorce Or Separation Db0a2265e751 – https://medium.com/@sonamchauhanastroindusoot/understanding-the-yogas-in-a-kundli-birth-chart-that-indicate-divorce-or-separation-db0a2265e751
[9] Separation – https://www.astroshastra.com/Marriage%20Astrology/separation.php
[10] Divorce Factors In Kundli Vedic Astrology Guide – https://vaya.so/blog/divorce-factors-in-kundli-vedic-astrology-guide

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