नमस्ते! ज्योतिषदेव.कॉम पर आपका स्वागत है। आज 26 अगस्त 2026, बुधवार के दिन की ऊर्जा सकारात्मकता और नई शुरुआत का संकेत दे रही है। आइए, जानते हैं आज का विस्तृत पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त।
🌞 सूर्य और चंद्रमा (Sun & Moon)
| घटना | समय (जगन्नाथ पुरी, ओडिशा) |
|---|---|
| सूर्योदय | 05:30 AM |
| सूर्यास्त | 06:07 PM |
| चंद्रोदय | 05:01 PM |
| चंद्रास्त | 03:37 AM (27 अगस्त) |
📅 आज का पंचांग (Panchang Details)
| विवरण | जानकारी (जगन्नाथ पुरी, ओडिशा) |
|---|---|
| तिथि | आज शुक्ल पक्ष त्रयोदशी 07:59 AM तक है, उसके बाद चतुर्दशी रहेगी. |
| नक्षत्र | श्रवण (27 अगस्त को 12:48 AM तक) |
| योग | सौभाग्य 07:59 AM तक, उसके बाद शोभन |
| करण | तैतिल 07:59 AM तक, उसके बाद गरज 08:37 PM तक, फिर वणिज |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| ऋतु (द्रिक) | शरद (Autumn) |
| ऋतु (वैदिक) | वर्षा (Monsoon) |
| अयन | दक्षिणायन |
✨ शुभ मुहूर्त (Auspicious Times)
| मुहूर्त का नाम | समय (जगन्नाथ पुरी, ओडिशा) |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | 11:23 AM से 12:14 PM तक। (हालांकि, बुधवार को अभिजीत मुहूर्त कुछ परंपराओं में त्याज्य माना जाता है) |
| अमृत काल | 07:05 AM से 08:39 AM (चौघड़िया के अनुसार) |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:45 AM से 05:33 AM |
⚠️ अशुभ समय (Inauspicious Times)
| नाम | समय (जगन्नाथ पुरी, ओडिशा) |
|---|---|
| राहु काल | 11:49 AM से 01:23 PM |
| यमगंड | 07:05 AM से 08:39 AM |
| गुलिक काल | 10:14 AM से 11:49 AM |
🕉️ व्रत और त्यौहार (Festivals)
आज 26 अगस्त 2026, बुधवार को **ओणम** का पर्व मनाया जा रहा है. ओणम मुख्य रूप से केरल में मनाया जाने वाला एक फसल उत्सव है, लेकिन इसे पूरे भारत में उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह राजा महाबली के घर वापसी का भी प्रतीक है. इस दिन लोग नए कपड़े पहनते हैं, घरों को फूलों से सजाते हैं (जिसे पूकलम कहते हैं), पारंपरिक ओणम साध्या (भोज) तैयार करते हैं, और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेते हैं. ओणम का पर्व भगवान विष्णु के वामन अवतार को भी समर्पित है. इस दिन आप भगवान विष्णु और राजा महाबली की पूजा कर सकते हैं, गरीबों को दान दे सकते हैं और परिवार के साथ मिलकर खुशियाँ मना सकते हैं.
आज **ऋग्वेद उपाकर्म** और **दूसरा चातुर्मास दिवस** भी है. ऋग्वेद उपाकर्म वेदों के अध्ययन और श्रद्धा के प्रति समर्पित एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है. चातुर्मास का दूसरा दिन आध्यात्मिक गतिविधियों और संयम के लिए विशेष महत्व रखता है.
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