आज 25 सितंबर 2026 को ब्रह्मांडीय ऊर्जा हमें संतुलन और पूर्णता की ओर मार्गदर्शन कर रही है। यह आत्मनिरीक्षण और आध्यात्मिक चिंतन के लिए एक शुभ दिन है।
🌞 सूर्य और चंद्रमा (Sun & Moon)
| घटना | समय (जगन्नाथ पुरी, ओडिशा) |
|---|---|
| सूर्योदय | 05:36 AM |
| सूर्यास्त | 05:40 PM |
| चंद्रोदय | 04:45 PM |
| चंद्रास्त | 04:06 AM (26 सितंबर) |
📅 आज का पंचांग (Panchang Details)
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| तिथि | चतुर्दशी (रात 11:06 PM तक), तत्पश्चात पूर्णिमा |
| नक्षत्र | शतभिषा (सुबह 11:22 AM तक), तत्पश्चात पूर्वा भाद्रपद |
| योग | शूल (दोपहर 02:51 PM तक), तत्पश्चात गंड |
| करण | गरज (सुबह 11:17 AM तक), तत्पश्चात वणिज (रात 11:06 PM तक) |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
| ऋतु | शरद (Autumn) |
| अयन | दक्षिणायन |
✨ शुभ मुहूर्त (Auspicious Times)
| मुहूर्त का नाम | समय (लगभग, दिल्ली के अनुसार) |
|---|---|
| अभिजीत मुहूर्त | 11:48 AM से 12:37 PM |
| अमृत काल | अगले दिन 03:28 AM से 05:05 AM |
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:35 AM से 05:23 AM |
⚠️ अशुभ समय (Inauspicious Times)
| नाम | समय (लगभग, दिल्ली के अनुसार) |
|---|---|
| राहु काल | 10:42 AM से 12:13 PM |
| यमगंड | 03:13 PM से 04:44 PM |
| गुलिक काल | 07:41 AM से 09:12 AM |
**कृपया ध्यान दें:** उपरोक्त मुहूर्त के समय दिल्ली के पंचांग पर आधारित हैं। जगन्नाथ पुरी के लिए इनमें थोड़ा अंतर हो सकता है, हालाँकि राहु काल, यमगंड और गुलिक काल की अवधि लगभग समान रहती है।
🕉️ व्रत और त्यौहार (Festivals)
आज, 25 सितंबर 2026, **अनंत चतुर्दशी** (Anant Chaturdashi) और **गणेश विसर्जन** (Ganesh Visarjan) का पवित्र दिन है। अनंत चतुर्दशी भगवान विष्णु के अनंत रूप को समर्पित है, जहाँ भक्त स्थिरता, सुरक्षा, समृद्धि और दीर्घकालिक समस्याओं से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। इस दिन, भक्त अपनी परंपराओं के अनुसार अनंत सूत्र की पूजा करते हैं और उसे धारण करते हैं। गणेश विसर्जन गणेश चतुर्थी समारोह के पारंपरिक समापन का प्रतीक है, जब भक्त भगवान गणेश को विदाई देते हैं और मूर्तियों को पानी में विसर्जित करते हैं। यह त्योहार समुदायों को एक साथ लाता है, एकता, आध्यात्मिक चिंतन और पूरे भारत और हिंदू समुदायों में सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देता है। भक्तों को इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करनी चाहिए, मोदक और अन्य प्रिय भोग चढ़ाने चाहिए, और फिर विधि-विधान से मूर्ति का विसर्जन करना चाहिए। अनंत चतुर्दशी पर भगवान विष्णु की पूजा के लिए, उन्हें पीले वस्त्र, पुष्प, और नैवेद्य अर्पित करें।
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