आज का पंचांग 13 फरवरी 2026: व्रत, त्यौहार, शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज का पंचांग: शुभ-अशुभ योग, व्रत-त्यौहार, मुहूर्त एवं ज्योतिषीय गणना (13 फरवरी 2026) 🕉️

नमस्कार 🙏, आज का पंचांग आपके जीवन के हर महत्वपूर्ण कार्य के लिए दिशा-निर्देश देने वाला है। पंचांग के माध्यम से जानिए कौन सा समय आपके लिए श्रेष्ठ है, कौन सा समय निषेध है, कौन-से योग आपके जीवन को प्रभावित कर सकते हैं, और आज के व्रत-त्यौहार का महत्व। यह पोस्ट आपको पूर्ण जानकारी और गाइडेंस देगा, जिससे आप अपने दिन को सफल और शुभ बना सकते हैं।

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🗓️ आज का पंचांग एवं तिथि

आज: 13 फरवरी 2026, शुक्रवार
स्थान: पुरी (जग्गनाथ पुरी), ओडिशा, भारत


🌅 सूर्योदय एवं चन्द्रोदय

🌞 सूर्योदय 06:17 AM
🌜 सूर्यास्त 05:45 PM
🌕 चन्द्रोदय 03:54 AM (14 फरवरी)
🌑 चन्द्रास्त 01:58 PM

📋 पंचांग विवरण (पुरी, ओडिशा)

तत्व विवरण गुण एवं धर्म
तिथि एकादशी (02:25 PM तक), द्वादशी व्रत, उपवास, धार्मिक कार्य
नक्षत्र मूल (04:12 PM तक), पूर्वाषाढा आध्यात्मिक, ध्यान
योग वज्र (03:23 AM, 14 फरवरी तक) शक्ति, दृढ़ता
करण बालव (02:25 PM तक), कौलव (03:17 AM, 14 फरवरी तक) शुभ, यात्रा
वार शुक्रवार लक्ष्मी, धन, सौभाग्य
पक्ष कृष्ण पक्ष तप, आत्मचिंतन
स्थान पुरी (जग्गनाथ पुरी), ओडिशा धार्मिक, तीर्थस्थल

📆 चन्द्र मास, सम्वत एवं बृहस्पति संवत्सर

पंचांग विवरण
विक्रम सम्वत 2082 कालयुक्त
शक सम्वत 1947 विश्वावसु
गुजराती सम्वत 2082 पिङ्गल
चन्द्रमास फाल्गुन (पूर्णिमान्त), माघ (अमान्त)
बृहस्पति संवत्सर कालयुक्त (अप्रैल 25, 2025 तक)

🌙 राशि तथा नक्षत्र

तत्व विवरण
चन्द्र राशि धनु
सूर्य राशि कुम्भ
नक्षत्र मूल (09:37 AM तक), पूर्वाषाढा (04:12 PM तक)
सूर्य नक्षत्र धनिष्ठा, पूर्वाषाढा

🌸 ऋतु तथा अयन

ऋतु विवरण
द्रिक ऋतु शिशिर
वैदिक ऋतु शिशिर
अयन उत्तरायण
दिनमान 11 घंटे 28 मिनट 07 सेकंड
रात्रिमान 12 घंटे 31 मिनट 19 सेकंड

अन्य कैलेण्डर एवं युग

तत्व विवरण
कलियुग 5126 वर्ष
कलि अहर्गण 1872619 दिन
जूलियन दिन 2461084.5 (जनवरी 31, 2026 CE)
राष्ट्रीय दिनांक माघ 24, 1947 शक
लाहिरी अयनांश 24.228678

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🕰️ शुभ समय (Auspicious Timings) 🌼

मुहूर्त समय उपयुक्त कार्य
ब्रह्म मुहूर्त 04:37 AM – 05:27 AM ध्यान, पूजा, मंत्र जाप
प्रातः सन्ध्या 05:02 AM – 06:17 AM सूर्य अर्घ्य, संध्या वंदन
अभिजित मुहूर्त 11:38 AM – 12:24 PM शुभ कार्य आरंभ, नए प्रोजेक्ट
विजय मुहूर्त 01:56 PM – 02:42 PM यात्रा, विजय की कामना
गोधूलि मुहूर्त 05:43 PM – 06:08 PM गृह प्रवेश, पूजा
अमृत काल 09:08 AM – 10:54 AM धन, संपत्ति, निवेश
निशिता मुहूर्त 11:36 PM – 12:26 AM (14 फरवरी) तंत्र, मंत्र, विशेष पूजा

इन शुभ समयों में पूजा, यज्ञ, नए कार्य आरंभ, निवेश, यात्रा, विवाह, गृह प्रवेश आदि कार्य करना श्रेष्ठ रहेगा।


⚠️ अशुभ समय (Inauspicious Timings) 🚫

समय निषेध कार्य
राहुकाल 10:35 AM – 12:01 PM
यमगण्ड 02:53 PM – 04:19 PM
गुलिक काल 07:43 AM – 09:09 AM
वर्ज्य 02:26 PM – 04:12 PM
दुर्मुहूर्त 08:35 AM – 09:20 AM, 12:24 PM – 01:10 PM
गण्ड मूल 06:17 AM – 04:12 PM
बाण मृत्यु 03:58 AM (14 फरवरी) से पूर्ण रात्रि तक

इन अशुभ समयों में विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, निवेश, पूजा, यात्रा आदि कार्य नहीं करना चाहिए।


🏵️ पंचक रहित मुहूर्त

समय मुहूर्त प्रकार
06:17 AM – 06:19 AM शुभ
06:19 AM – 07:55 AM रोग पंचक
07:55 AM – 09:29 AM शुभ
09:29 AM – 11:12 AM शुभ
11:12 AM – 01:11 PM रोग पंचक
01:11 PM – 02:25 PM शुभ
02:25 PM – 03:24 PM मृत्यु पंचक
03:24 PM – 04:12 PM अग्नि पंचक
04:12 PM – 05:38 PM शुभ
05:38 PM – 07:47 PM रज पंचक
07:47 PM – 09:54 PM शुभ
09:54 PM – 12:06 AM (14 फरवरी) चोर पंचक
12:06 AM – 02:21 AM (14 फरवरी) शुभ
02:21 AM – 04:27 AM (14 फरवरी) रोग पंचक
04:27 AM – 06:16 AM (14 फरवरी) शुभ

पंचक रहित शुभ मुहूर्त में विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार, पूजा, यात्रा आदि कार्य करना श्रेष्ठ है। पंचक काल में मुण्डन, गृह निर्माण, विवाह आदि कार्य निषेध हैं।


🏠 निवास और शूल

तत्व विवरण
होमाहुति राहु (04:12 PM तक)
दिशा शूल पश्चिम
चन्द्र वास पूर्व
अग्निवास आकाश (02:25 PM तक)
राहु वास दक्षिण-पूर्व
शिववास कैलाश (02:25 PM तक)
पाताल कुम्भ चक्र (04:12 PM तक)

दिशा शूल के अनुसार पश्चिम दिशा में यात्रा या कार्य करने से बचना चाहिए।


🧘‍♂️ दैनिक उपवास और त्यौहार

कृष्ण भीष्म द्वादशी

कृष्ण भीष्म द्वादशी का व्रत महाभारत के भीष्म पितामह के स्मरण में किया जाता है। इस दिन व्रती भीष्म पितामह के शौर्य, सत्यनिष्ठा और धर्म का स्मरण करते हैं।

  • व्रत विधि: प्रातः स्नान कर, भीष्म पितामह की पूजा, गंगा जल से अर्घ्य, और धार्मिक ग्रंथों का पाठ।
  • महत्व: इस व्रत से धर्म, सत्य और कर्तव्य में दृढ़ता आती है।
  • उपवास: फलाहार, जल, या अन्न का त्याग, संकल्प के अनुसार।

कुम्भ संक्रान्ति

कुम्भ संक्रान्ति सूर्य के कुम्भ राशि में प्रवेश का पर्व है।

  • पूजन विधि: प्रातः स्नान, सूर्य को अर्घ्य, दान-पुण्य, तिल, वस्त्र, अन्न का दान।
  • महत्व: नदियों में स्नान, दान-पुण्य से पापों का नाश एवं पुण्य की प्राप्ति।

विजया एकादशी

विजया एकादशी का व्रत भगवान विष्णु के लिए किया जाता है।

  • व्रत विधि: प्रातः स्नान, श्री विष्णु की पूजा, तुलसी पत्र, फलाहार, रातभर जागरण।
  • महत्व: इस व्रत से सभी पापों का नाश, विजय, सफलता, और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

अन्य उपयोगी जानकारी

  • चन्द्रबलम एवं ताराबलम: मिथुन, कर्क, तुला, धनु, कुम्भ, मीन राशि वालों के लिए चन्द्रबल श्रेष्ठ।
  • नक्षत्र बल: भरणी, कृत्तिका, मृगशिरा, पुनर्वसु, अश्लेषा, पूर्वाफाल्गुनी, उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, विशाखा, ज्येष्ठा, पूर्वाषाढा, उत्तराषाढा, धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपद, रेवती नक्षत्र वालों के लिए ताराबल उत्तम।
  • लग्न मुहूर्त: मकर से धनु तक अलग-अलग समय, विवाह, गृह प्रवेश, व्यापार आदि के लिए उपयोगी।
  • शिशिर ऋतु: स्वास्थ्य, ऊर्जा, ध्यान, साधना के लिए उत्तम।
  • उत्तरायण: शुभ कार्य, नए आरंभ, दान-पुण्य के लिए श्रेष्ठ।

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