आज का पंचांग विश्लेषण – 5 फरवरी 2026, बृहस्पतिवार
आज का दिन भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण पंचांग विवरण लेकर आया है। इस पंचांग में सूर्य और चंद्र के समय से लेकर शुभ-अशुभ मुहूर्तों तक सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ हैं, जो हर हिंदू अनुयायी के लिए धार्मिक एवं सामाजिक क्रियाकलापों में मार्गदर्शक सिद्ध होंगी। आइए विस्तार से जानें आज के पंचांग के सभी पहलू।
आज का पंचांग एवं तिथि
दिनांक: 5 फरवरी 2026
वार: बृहस्पतिवार
स्थान: जगन्नाथ पुरी, भारत
तिथि: कृष्ण पक्ष, चतुर्थी (12:22 AM तक), तत्पश्चात पंचमी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
संवत्सर: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त)
बृहस्पति संवत्सर: कालयुक्त (25 अप्रैल 2025 तक)
वार: बृहस्पतिवार
स्थान: जगन्नाथ पुरी, भारत
तिथि: कृष्ण पक्ष, चतुर्थी (12:22 AM तक), तत्पश्चात पंचमी
पक्ष: कृष्ण पक्ष
संवत्सर: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त)
बृहस्पति संवत्सर: कालयुक्त (25 अप्रैल 2025 तक)
सूर्य उदय एवं चंद्र उदय
| घटना | समय |
|---|---|
| सूर्य उदय | 06:21 AM |
| सूर्य अस्त | 05:41 PM |
| चंद्र उदय | 08:56 PM |
| चंद्र अस्त | 08:30 AM (अगले दिन) |
पंचांग विवरण (मुख्य तत्व) 📜
| पंचांग तत्व | विवरण | गुण और धर्म |
|---|---|---|
| तिथि | चतुर्थी (12:22 AM तक), बाद में पंचमी | चतुर्थी तिथि शुभ, पंचमी भी शुभ तिथि |
| नक्षत्र | उत्तराफाल्गुनी (10:57 PM तक) | उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शुभ माना जाता है |
| योग | सुकर्मा (12:04 AM तक) | सुकर्मा योग शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त |
| करण | बव (12:10 PM तक), बालव (12:22 AM तक) | करण शुभ कार्यों में सहायक |
| वार | गुरुवार (बृहस्पतिवार) | गुरुवार को धार्मिक कार्यों के लिए शुभ माना जाता है |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष | व्रत एवं उपवास के लिए उपयुक्त पक्ष |
चंद्र मास, संवत एवं बृहस्पति संवत्सर
- चंद्र मास: फाल्गुन (पूर्णिमान्त)
- संवत: विक्रम संवत 2082 (कालयुक्त)
- बृहस्पति संवत्सर: कालयुक्त (25 अप्रैल 2025 तक)
राशि तथा नक्षत्र 🌟
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| चंद्र राशि | कन्या |
| सूर्य राशि | मकर |
| सूर्य नक्षत्र | श्रवण (10:57 PM तक) |
| नक्षत्र पद | हस्त (5:15 AM तक, 6 फरवरी) |
ऋतु तथा अयन 🍂
| तत्व | विवरण |
|---|---|
| द्रिक ऋतु | शिशिर (शीत ऋतु) |
| वैदिक ऋतु | शिशिर |
| द्रिक अयन | उत्तरायण |
| वैदिक अयन | उत्तरायण |
शुभ समय (Auspicious Timings) ⏳
| मुहूर्त | समय | उपयुक्त कार्य |
|---|---|---|
| ब्रह्म मुहूर्त | 04:39 AM – 05:30 AM | सुबह उठकर पूजा, अध्ययन, ध्यान |
| अभिजित मुहूर्त | 11:38 AM – 12:23 PM | सभी शुभ कार्य, निर्णय लेना |
| विजय मुहूर्त | 01:54 PM – 02:40 PM | यात्रा प्रारंभ, नए कार्य की शुरुआत |
| गोधूलि मुहूर्त | 05:39 PM – 06:04 PM | शाम की पूजा, धार्मिक अनुष्ठान |
| अमृत काल | 03:32 PM – 05:11 PM | स्वास्थ्य वर्धक कार्य, शुभ क्रियाएँ |
| निशिता मुहूर्त | 11:35 PM – 12:26 AM | महत्वपूर्ण कार्य, मंत्र जाप, पूजा |
अशुभ समय (Inauspicious Timings) ⚠️
| काल | समय | निषेध कार्य |
|---|---|---|
| राहुकाल | 01:26 PM – 02:51 PM | विवाह, गृह प्रवेश, नए कार्य प्रारंभ न करें |
| यमगण्ड | 06:21 AM – 07:46 AM | शुभ कार्य न करें |
| गुलिक काल | 09:11 AM – 10:36 AM | नए कार्य, निवेश न करें |
| दुर्मुहूर्त | 10:07 AM – 10:53 AM | शुभ कार्य टालें |
अन्य कैलेंडर एवं युग
- कलियुग: 5126 वर्ष
- लाहिरी अयनांश: 24.228372
- कलि अहर्गण: 1,872,611 दिन
- जूलियन दिनांक: 23 जनवरी 2026 CE (जूलियन दिन 2461076.5)
पंचक रहित मुहूर्त (विशेष विवरण)
आज के दिन विभिन्न पंचक काल हैं, जो अशुभ माने जाते हैं, लेकिन इनके बीच शुभ मुहूर्त भी उपलब्ध हैं।
| पंचक काल | समय | विवरण |
|---|---|---|
| मृत्यु पंचक | 06:21 AM – 06:51 AM | अशुभ, महत्वपूर्ण कार्य न करें |
| अग्नि पंचक | 06:51 AM – 08:27 AM | अशुभ काल |
| शुभ मुहूर्त | 08:27 AM – 10:00 AM | शुभ कार्य करें |
| मृत्यु पंचक | 10:00 AM – 11:43 AM | अशुभ काल |
| अग्नि पंचक | 11:43 AM – 01:43 PM | अशुभ काल |
| शुभ मुहूर्त | 01:43 PM – 03:56 PM | शुभ कार्य करें |
| रज पंचक | 03:56 PM – 06:09 PM | अशुभ काल |
| शुभ मुहूर्त | 06:09 PM – 08:18 PM | शुभ कार्य करें |
| चोर पंचक | 08:18 PM – 10:26 PM | अशुभ काल |
| शुभ मुहूर्त | 10:26 PM – 10:57 PM | शुभ कार्य करें |
| रोग पंचक | 10:57 PM – 12:22 AM (6 फरवरी) | अशुभ काल |
| शुभ मुहूर्त | 12:22 AM – 12:38 AM (6 फरवरी) | शुभ कार्य करें |
निवास और शूल
- होमाहुति: मंगल तक (10:57 PM तक)
- दिशा शूल: दक्षिण
- गुरु नक्षत्र शूल: उत्तर (10:57 PM तक)
- अग्निवास: आकाश (12:22 AM, 6 फरवरी तक)
- चंद्र वास: दक्षिण
- राहु वास: दक्षिण
- शिववास: कैलाश पर (12:22 AM, 6 फरवरी तक)
- कुम्भ चक्र: गर्भ
दैनिक उपवास और त्यौहार 🕉️
- द्विजप्रिय संकष्टी व्रत: आज का दिन द्विजप्रिय संकष्टी व्रत के लिए विशेष है। यह व्रत भगवान गणेश की पूजा के लिए समर्पित है और इस दिन व्रत रखने से सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन में सफलता मिलती है।
- व्रत विधि:
- सूर्योदय से पहले स्नान करें।
- भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें।
- संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रमा के उदय के बाद व्रत खोलना शुभ माना जाता है।
- इस दिन हल्का भोजन करें या निर्जला व्रत रखें।
- कथा और मंत्रों का पाठ करें, जैसे “संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा”।
- उपवास के लाभ: मानसिक शांति, बाधाओं का निवारण, परिवार में सौहार्द बढ़ाना।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी
- पंचांग में वर्णित सभी समय स्थानीय समय (जगन्नाथ पुरी) के अनुसार हैं।
- पंचांग के पाँच मूलभूत तत्व: तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार, सभी शुभ-अशुभ कार्यों के निर्णय में सहायक हैं।
- अभिजित मुहूर्त और विजय मुहूर्त विशेष रूप से शुभ कार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं।
- राहुकाल और अन्य अशुभ कालों में कोई भी शुभ कार्य आरंभ न करें।
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